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उदिता
उदिता: उन दिनों के लिए पहल
माहवारी: नैसर्गिक प्रक्रिया के संकट
किसी भी स्त्री के जीवन की एक खूबसूरत प्रक्रिया है माहवारी। यही प्रक्रिया स्त्री के जीवन को पूर्ण बनाती है। किंतु हमारे समाज के तानेबाने में यह नैसर्गिक क्रिया अभिशाप बनकर सामने आती है। छुआछूत, भेदभाव, शर्म जैसे पहलू इसके साथ जुड़े हैं। कई अव्यावहारिक और असुरक्षित तौर-तरीके इसके साथ जु़ड़े हुए हैं। अब जबकि महिलाएं अंतरिक्ष में जा रहे हैं तब भी मासिक धर्म और इससे संबंधी व्यवहारों में महिलाओं और किशोरियों के लिए कई सामाजिक-सांस्कृतिक अवरोध इस जमाने में भी मौजूद हैं। अस्वच्छ तौर-तरीके किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए ऐसी समस्याएं उत्पन्न कर देते हैं जो शारीरिक रूप से उनके पूरे जीवन को प्रभावित कर देते हैं।

क्यों उदिता?
उल्लेखनीय है कि माहवारी एक सामान्य प्रक्रिया होने के बाद भी, इस पर खुलकर बात करना या प्रबंधन करना वर्जित है। इस उपेक्षा के चलते आज भी 70 प्रतिशत महिलाएं इसे गंदा मानती हैं। घरों में शौचालय न होने से लगभग 66 प्रतिशत महिलाएं खुले में इसका प्रबंधन करती हैं। प्रतिवर्ष लगभग 20 प्रतिशत लड़कियां माहवारी के कारण स्कूल जाना बंद कर देती हैं। लगभग 88 प्रतिशत महिलाएं माहवारी के दौरान पुराने कपड़े, रेत, लकड़ी, सूखे पत्ते आदि का उपयोग करती हैं। इन सबके कारण भारत में लगभग 72 हजार महिलायें सर्वायकल कैंसर का शिकार हो जाती हैं। उन्हे माहवारी संक्रमण जैसे सफेद पानी आना, खुजली, जलन, गर्भाशय में सूजन, बार-बार पेशाब जाने की शिकायत भी हो सकती है। इसके अलावा माहवारी संक्रमण एवं स्कूल/अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त स्वच्छता संबंधी सुविधाएं न होने के कारण बालिकाओं की स्कूल में अनुपस्थिति बढ़ती है या स्कूल जाना ही बंद हो जाता है। उनकी कार्य कुशलता में भी कमी हो जाती है। यदि समय से ध्यान नहीं दिया जाए तो संक्रमण योनि तक पहुंचकर गर्भनाल में प्रवेश कर सकता है। संचालनालय एकीकृत बाल विकास सेवा ने इस दिशा में सकारात्मक प्रयास करते हुए उदिता योजना पिछले वर्ष से शुरू की थी। वाॅटरएड जैसी संस्थाएं इसमें सरकार को सहयोग कर रही हैं

उदिता ताकि उदय हो नए सदी का
मध्यप्रदेश की संवेदनशील सरकार ने इस समस्या को समझा। इसकी जड़ में गए और इसे दूर करने की एक पहल की। यह पहल है उदिता। यह समस्या व्यवहार संबंधी अधिक है, इसलिए इसकी शुरूआत से ही खत्म करने की रणनीति बनाई। यानी उस पहले दिन से जबकि एक स्त्री के जीवन में इसकी शुरूआत होती है। बिना किसी झिझक, बिना किसी संकोच के उसे पूरा-पूरा सहयोग मिल सके। न वो घर में उपेक्षित हो, न स्कूल में और न आस-पड़ोस में। इसके साथ ही उसे सही व्यवहार मिल सके, जिससे उसका स्वास्थ्य भी किसी खतरे में न पड़े। इसके लिए सबसे जरूरी है कि उसे सेनेटरी नेपकिन भी मिल सके। सुविधा की जगह पर, सस्ती दरों पर। इसके लिए उसका अपना कोना हो, हर गांव में, हर आँगनवाड़ी में। इसकी शुरूआत प्रदेश में हो चुकी है।

उदिता योजना
किशोरियों में माहवारी स्वच्छता तथा समुचित माहवारी प्रबंधन के बारे में जागरूकता तथा संवेदनशीलता बढ़ाने, अच्छी गुणवत्ता वाले सेनेटरी नेपकिन के प्रयोग व उसे व्यवहार में लाने के लिए प्रोत्साहित करने, गाँव स्तर पर सेनेटरी नेपकिन की उपलब्धता एवं बालिकाओं तक इसकी पहुँच सुनिश्चित करने एवं किशोरियों में एनीमिया एवं पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने हेतु उदिता योजना चलायी जा रही है। प्रथमतः इसे प्रदेश के ग्वालियर, इन्दौर एवं झाबुआ जिलों में इसे लक्षित एवं सघन रुप से चलाया गया। इसके बाद रायसेन, भोपाल, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, बुरहानपुर जिलों में विस्तार किया गया है। अब उदिता योजना पूरे प्रदेश में संचलित की जायेगी।

उदिता कार्नर-किशोरियों की अपनी जगह
यह ऐसी जगह है जहां किशोरी बालिकाएं बेहिचक अपने उन मामलों के संबंध में बातचीत कर सकती हैं। अपनी समस्याओं को आँगनवाड़ी कार्यकर्ता से कह-सुन सकती हैं। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता को सेनेटरी नेपकिन का डिपो होल्डर बनाया गया है ताकि किशोरी बालिकाएं अपने लिए बेहद आसानी से सेनेटरी नैपकिन ले सकती हैं। अपने स्वास्थ्य के विषय में जानकारी हासिल कर सकती हैं। पूरे प्रदेश में 51000 आँगनवाड़ी केन्द्रों पर उदिता कार्नर स्थापित किए जा चुके हैं। जल्दी ही प्रदेश के प्रत्येक आँगनवाड़ी केन्द्र पर उदिता कार्नर बनाये जायेंगे। इन उदिता कार्नर से लाखों किशोरी बालिकाएं जानकारी, परामर्श और सेनेटरी नेपकिन प्राप्त कर रही हैं।

क्या होता है कार्नर पर?
उदिता कार्नर पर हर महीने के चौथे मंगलवार या अन्य निश्चित दिन किशोरियों के लिए माहवारी एवं स्वच्छता पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाता है। इसमें अर्श क्लिीनिक के सलाहकार, ए.एन.एम./आशा को जानकारी देने आमंत्रित किया जाता है। किशोरियों की दादी या अन्य बुजुर्ग महिला को भी इस आयोजन में शामिल किया जाता है। ताकि वह सेनेटरी नेपकिन के उपयोग हेतु उन्हें सहयोग करें। अतिथि के रूप में महिला सरपंच, पंच, शिक्षिका को भी आमंत्रित किया जाता है, ताकि यह अभियान एक महाअभियान में बदल सके। केवल चर्चा ही नहीं किशोरियों के साथ उसका फालोअप भी इस अभियान का एक हिस्सा है।

सेनेटरी नेपकिन वेंडिंग मशीन
उदिता कार्नर के अलावा आँगनवाड़ी के आस-पास, प्रशिक्षण केन्द्रों में, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों, कन्या छात्रावासों में, शासकीय/निजी अस्पतालों में, महिलाओं के काम करने के स्थानों, स्थानीय दुकानों, स्व सहायता समूहों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सेनेटरी नेपकिन की उपलब्धता/ वेंडिंग मशीन की सुविधा सुनिश्चित की जा रही है। इसके लिए पूरे मध्यप्रदेश में जनसहयोग एवं समन्वय से 600 वेंडिंग मशीन स्थापित की जा चुकी हैं।

किशोरियों में एनीमिया
किशोरियों में एनीमिया भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आता है। इसे काम करने की क्षमता और उत्पादकता में कमी हो जाती है। बीमारियों से लड़ने की ताकत में कमी यानी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और इससे किशोरियां बार-बार बीमार पड़ जाती हैं। इसका असर शादी के बाद भी देखने को मिलता है जैसे जैसे जच्चा की मृत्यु, समय से पहले और कम वजन का बच्चा होना, शिशु की जन्म के बाद मृत्यु। किशोरियों में एनीमिया संबंधी जागरूकता बढ़ाने और NIPI कार्यक्रम से जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता की निगरानी में साप्ताहिक आई.एफ.ए. का सेवन, एनीमिया की स्क्रीनिंग/ रेफरल एवं कृमि नाशन हेतु वर्ष में एक बार एलबेन्डाजाॅल की गोली का सेवन कराया जा रहा है। शीघ्र ही किशोरियों को घर पर पोषण वाटिका (Nutri Garden) लगाने हेतु प्रशिक्षित किया जायेगा।
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सफलता की कहानी

हल हो गई उन दिनों की समस्या
होशंगाबाद जिले की सिवनी मालवा परियोजना के सेक्टर सतवासा के आँगनबाड़ी केन्द्र हिरनखेड़ा में उदिता कार्नर स्थापित किया गया। इस ग्राम पंचायत हिरनखेड़ा में 03 आँगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं। गाँव में कुल 158 किशोरी बालिकाएं हैं। हिरनखेड़ा में भी और गाँव की तरह माहवारी के दौरान किशोरियां अस्वच्छ कपड़ों का उपयोग करते रही हैं। गाँव में उदिता कार्नर स्थापित होने के बाद प्रत्येक मंगलवार को किशोरी बालिकाएं आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आती हैं। बालिकाओं से पूछा कि माहवारी के दौरान आप क्या इस्तेमाल करती हैं ? किशोरियों ने बताया कि कपड़ा इस्तेमाल करते हैं। जब उन्हें नेपकिन का उपयोग करने को कहा तो बालिकाओं ने बताया कि हमें कौन लाकर देगा, हमें शर्म महसूस होती है। अपने माता-पिता या भाई से नहीं बोल सकते इसलिए हम घर में उपलब्ध पुराने कपड़ों का उपयोग करते हैं। ज्योति एवं सरोज ने बताया कि हम घरेलू नेपकिन का उपयोग 04-05 माह तक करते हैं। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता विनीता लौवंशी द्वारा बालिकाओं को समझाइश दी गई कि लम्बे समय तक नेपकिन स्तेमाल करने से संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। साफ-सफाई एवं अन्य उद्देश्य को ध्यान में रखकर कार्यकर्ता द्वारा कच्ची सामग्री लाकर बालिकाओं को पेड बनाना बताया जा रहा है और बाजार की अपेक्षा सस्ती कीमत पर नेपकिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हिरनखेड़ा गांव में अब उदिता कार्नर के कारण बालिकाओं की आदत में बदलाव आया है। उदिता कार्नर पर आसानी से और सस्ती दरों पर नेपकिन उपलब्ध हो जाने से वह अब जरूरत पड़ने पर यहीं से ले जाती हैं। दुर्गा, चंदा, निकिता, पूजा, आरती, प्रिया सभी खुश हैं और उन्होने बताया कि हमारी उन दिनों की समस्या उदिता कार्नर से हल हो गई है। अब ग्राम की अन्य महिलाएं भी नेपकिन की मांग करने लगी हैं। आज हिरनखेड़ा का उदिता कार्नर ग्राम की महिलाओं के लिए वरदान साबित हुआ है।

समझ आया कि माहवारी कोई बीमारी नहीं है
छिंदवाड़ा जिले का गांव पाटनढाना। गाँव में 59 बालिकाएं किशोरी हैं। कुछ माह पहले तक यह किशोरी अपने मासिक धर्म में असुरक्षित व्यवहार का शिकार थीं। वही गंदे कपड़े, बार-बार। इससे कई लड़कियों को बीमारी हो गईं। किसी को सफेद पानी, किसी की जांघों में छाले, कोई एनीमिया का शिकार, और किसी को धातु जाने की शिकायत। संकोच के कारण स्कूल न जाना, पढ़ाई-लिखाई में मन न लगना। यही समस्या सालों से चली आ रही है। सरकार की ‘उदिता योजना’इस गांव के लिए एक रोशनी बनकर सामने आई। एकीकृत बाल विकास परियोजना तामिया अंतर्गत आँगनवाडी केन्द्र पाटनढाना में नवम्बर 2015 में उदिता कार्नर बनाया गया। यहां किशोरी बालिकाओं को सेनेटरी पेड का उपयोग करना बताया गया।
उदिता कार्नर में जाकर किशोरियों और उनके परिजनों को समझ आया कि कुछ सावधानियों से और उचित व्यवहार से लड़कियां कई परेशानी से बच सकती हैं। सेनेटरी पेड का उपयोग करने से बीमारियों से बचा जा सकता है। समझ आया कि माहवारी कोई बीमारी नहीं होती।
गांव की चांदनी यदुवंशी की उम्र 14 साल है। उसके पिता नोखेलाल और माँ का नाम गीता है। चांदनी ने बताया कि जब सेनेटरी पेड के बारे में मालूम नहीं था तो मुझे छाले हो जाते थे। जबसे आँगनवाड़ी केन्द्र में उदिता कार्नर स्थापित किया गया है तब से मुझे आँगनवाड़ी केन्द्र से सेनेटरी पेड निःशुल्क मिलना शुरू हुआ। इसके बाद मेरी यह समस्या ही दूर हो गई। मैं अब उन दिनों में अच्छा अनुभव करती हूँ।
कीर्ति भारती की उम्र भी 14 साल है। कीर्ति कहती है कि मेरी मम्मी नहीं होने के कारण मुझे इसके बारे में बताने वाला भी कोई नहीं था। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बाजार से सेनेटरी पेड भी नहीं खरीद सकती थी, लेकिन जब से गाँव के आँगनवाडी केन्द्र में उदिता कार्नर बनाया गया है और सेनेटरी पेड मिलने लगे हैं तब से मेरी समस्या हल हो गई है।
संतोषी यदुवंशी भी 15 साल की हैं। उनका कहना है कि मुझे सेनेटरी पेड का उपयोग कैसे करते हैं मालूम नहीं था, लेकिन जब से हमारी आँगनवाडी केन्द्र में उदिता कार्नर बनाया गया तब से बहुत कुछ बदल गया है। हमारी आदत बदल गई है।
रूपा भारती का कहना है कि जब से उदिता कार्नर बना है हमारी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। सेनेटरी पेड का उपयोग करने से अब मैं स्कूल जाने में संकोच नहीं करती हूं और खेलकूद में भाग लेती हूं।
गायत्री यदुवंशी पति दयाराम यदुवंशी का कहना है कि मुझे सेनेटरी पेड के बारे में अभी तक मालूम नहीं था। मासिक धर्म के समय कपड़े का उपयोग करती थी। जिससे मुझे सफेद पानी की समस्या रहती थी, लेकिन जब से हमारे आँगनवाडी केन्द्र में उदिता कार्नर बना है और आँगनवाड़ी कार्यकर्ता यशोदा डेहरिया द्वारा सेनेटरी पेड के फायदे के बारे में बताया है तब से मेरी धात की बीमारी जैसी खत्म हो गयी है।
आँगनवाड़ी कार्यकर्ता यषोदा डेहरिया का कहना है कि आँगनवाडी केन्द्र में 59 किशोरी बालिकाएं हैं। उदिता कार्नर खुलने से पहले मात्र चार-पांच किशोरी बालिकाएं ही सेनेटरी पेड का इस्तेमाल करती थीं, लेकिन जबसे आँगनवाडी केन्द्र में उदिता कार्नर बना है तब से 25 किशोरी बालिकाएं सेनेटरी पेड का उपयोग करने लगी हैं। विवाहित महिलाएं भी इसके उपयोग के बारे में जानने लगी हैं और इसका उपयोग करने लगी हैं। गाँव की महिला एवं किशोरी बालिकाएं अब शारीरिक स्वच्छता महसूस करने लगी हैं।

माहवारी स्वच्छता दिवस माहवारी स्वच्छता दिवस 28 मई, 2016 को संपूर्ण प्रदेश में माहवारी स्वच्छता दिवस का आयोजन किया गया एवं लगभग 18 लाख किशोरी बालिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। किशोरियों में माहवारी स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं प्रबंधन हेतु चलाये जा रहे उदिता कार्यक्रम का एक वर्ष पूरा होने पर उसकी उपलब्धियों को प्रदर्शित करते हुए एक भव्य आयोजन स्थानीय समन्वयन भवन में किया गया। माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम किशोरियों के लिये जाॅयफुल ट्रैनिंग के जैसे साबित हुआ। माहवारी एवं इससे जुड़ी भ्रांतियाँ पर क्विज़, फिल्म प्रदर्शन, पोस्टर, विशेषज्ञों से बातचीत ने किशोरियों का ज्ञानवर्धन कर उनके आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी की। स्थानीय कलाकारों ने नृत्य नाटिका और बेले के रूप में माहवारी को जीवन की आशा के रूप में प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर किशोरियों के लिये स्लोगन राईटिंग, एम्ब्रायडरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित 500 लड़कियों ने सेनेटरी वेंडिंग मशीन एवं इनसिनीरेटर की भी जानकारी प्राप्त की।
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Category: UDITA
Upload Date Time: 22 Jun 2016 18 18 39
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